होम | लोकसभा चुनाव 2019 | जान का खतरा बताकर उर्मिला मातोंडकर ने मांगी पुलिस सुरक्षा, जानें क्या है पूरा मामला...


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उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) ने कांग्रेस-बीजेपी कार्यकर्ताओं की हाथापाई के बाद जान का खतरा बताकर मुंबई पुलिस (Mumbai Police) से सुरक्षा की मांग की है. उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) मुंबई उत्तर से कांग्रेस उम्मीदवार हैं. पुलिस ने बताया कि बोरीवली स्टेशन के पास हाथापाई हुई, जहां उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar Congress) प्रचार कर रही थीं. मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने बोरीवली रेलवे स्टेशन के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को देखते ही 'मोदी-मोदी' के नारे लगाने शुरू कर दिए थे. इस सीट से भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद गोपाल शेट्टी को ही मैदान में उतारा है. उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar News) ने पत्रकारों को बताया कि भाजपा के कुछ कार्यकर्ता उनकी रैली में घुस गए थे, जिसके बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.


उर्मिला मातोंडकर मुंबई नॉर्थ से लड़ेंगी चुनाव तो बॉलीवुड प्रोड्यूसर बोले- जमानत भी नहीं बचा पाएंगी...उर्मिला मातोंडकर ने कहा कि जो लोग रैली में 'घुसे' थे वे आम लोग नहीं थे, बल्कि भाजपा के थे. उन्होंने कहा कि आम लोग 'हिंसक तरीके' से पेश नहीं आएंगे जैसे कि ये लोग पेश आए. उन्होंने कहा, 'जो हमारी रैली में घुसे वे अश्लील तरीके से नाच रहे थे और उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. शायद वे हमारे पास चल रही महिलाओं को डराना चाहते थे.' उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर निर्वाचन आयोग के पास जाने पर विचार कर रही हैं.

 उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर लोकसभा सीट (Sultanpur Seat) पर इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है. 2014 में पौने दो लाख वोट के अंतर से चुनाव जीतने वाले वरुण गांधी (Varun Gandhi) की जगह जब बीजेपी ने इस सीट से उनकी मां मेनका गांधी (Maneka Gandhi) को मैदान में उतारा, तभी इसके सियासी मायने निकाले जाने लगे. कहा गया कि सीटों की अदलाबदली का सुझाव खुद मेनका गांधी ने दिया था, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि सुल्तानपुर में वरुण की स्थिति 2014 जितनी मजबूत नहीं रही. एक तरफ गठबंधन उनके लिए खतरा था, तो दूसरी तरफ कांग्रेस भी मजबूती से ताल ठोंक रही थी. ऐसे में सुल्तानपुर से खुद मेनका गांधी मैदान में उतरीं और बेटे वरुण को अपनी सीट पीलीभीत भेज दिया. लेकिन मेनका गांधी (Maneka Gandhi) के लिए भी सुल्तानपुर की राह आसान नजर नहीं आ है. 

कांग्रेस बिगाड़ सकती है भाजपा का खेल 
2009 में सुल्तानपुर से चुनाव जीत चुके कांग्रेस नेता संजय सिंह (Sanjay Sinh) भी इस बार मजबूती से मैदान में डटे नजर आ रहे हैं. 2014 में उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा था और उनकी पत्नी अमिता सिंह मैदान में थीं, जिन्हें चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा था. उस दौरान ऐसा कहा गया कि संजय गांधी से नजदीकी की वजह से उनके बेटे वरुण के खिलाफ संजय सिंह (Dr Sanjay Sinh) चुनाव मैदान में नहीं उतरे, लेकिन 2014 से 2019 तक काफी कुछ बदल चुका है. 2009 के चुनाव में संजय सिंह ने करीब एक लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी. स्थानीय लोगों की मानें तो उस दौरान संजय सिंह ने क्षेत्र का ठीकठाक विकास किया था और 2014 के बाद भी लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं. यह बात उनके पक्ष में जाती है.  हालांकि पुराने आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करें तो इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले गठबंधन का पलड़ा भारी नजर आता है. सुल्तानपुर (Sultanpur Seat) में 12 मई को चुनाव होना है और 23 मई को नतीजों के साथ ही यह साफ हो जाएगा कि आखिर सुल्तानपुर की जनता ने किसे अपना 'सुल्तान' चुना है. 

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