कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर काशी के तट पर देव दिवाली मनाई जाती है

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर काशी के तट पर देव दिवाली मनाई जाती है । चारो तरफ मंत्रो के उच्चारण और घंटे घंटियों  की गुंज्ज और द्वीप से सजे घाटों की झिलमिलाट ऐसा लगता है मानो सवर्ग का अनुवभ करवा रहा हो।दिवाली से १५ दिंन बाद कार्तिक की पूणिमा मै यह पर्व मन्या जाता हे । कहा जात्ता ह इस दिन भगवान शिव ने काशी को त्रिपुरा से मुक्क्त करवाया था । इस पर्व मै माता गंगा और शिवे की आराधना की जाती है ।पुराणों से ज्ञात्त होता है की  इस दिन भगवान शिव सहित सभी देवता धरती पे आते है और द्वीप जलाते है दीपो से सजा ह्रर घाट अपना इत्तिहास बयान करता  है । ईस दिंन द्वीप दान और अन्न दान का बहुत महत्त्व है। लाखो की सांख्य।मै सेलंनियो 
 की भीड़ उमड़ केर आती है विदेशी पर्यटक यह कर द्वीप दान कर की आनद ुट्टे है ऐसा भी मन जाता है की भववान विष्णु अपने चुमास की निंर्दा से जागते है ।

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